श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया स्वामी सहज प्रकाशानंद परमहंस जी का 50वां महासमाधि दिवस। मानस तीर्थ सोनकुंड में आज बैशाखी अमावस्या 17 अप्रैल को
आध्यात्मिक जगत के देदीप्यमान नक्षत्र, पूज्य श्री श्री 1008 श्री स्वामी सहज प्रकाशानंद परमहंस जी महाराज का 50वां पावन महासमाधि दिवस आज अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भक्तिमय वातावरण में मनाया गया। इस स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर आश्रम में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और सत्संग का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं भक्तों ने भाग लेकर अपनी भावांजलि अर्पित की।
दिव्य अनुष्ठान और साधना महोत्सव का शुभारंभ ब्रह्ममुहूर्त में गुरु वंदना और महाभिषेक के साथ हुआ। इसके पश्चात सामूहिक श्री गुरु गीता पाठ का आयोजन किया गया। आश्रम परिसर पूज्य स्वामी जी के जयकारों और भक्तिमय भजनों से गुंजायमान रहा। पूज्य श्री श्री108 श्री स्वामी शिवानंद जी महाराज की पावन सानिध्य में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। पूज्य स्वामी श्री शिवानंद महाराज जी ने स्वामी परमहंस श्री सहज प्रकाशानंद जी महाराज के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा की पूज्य स्वामी जी ने अपने नाम के अनुरूप ही अत्यंत 'सहज' मार्ग से परमात्मा की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त किया। उनकी निस्वार्थ सेवा, के प्रति प्रेम और मानवता के कल्याण के लिए किए गए कार्य आज भी शिष्यों के लिए मार्गदर्शक हैं। उनके जीवन का मुख्य संदेश "सहजता ही श्रेष्ठ साधना है" आज के भागदौड़ भरे जीवन में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है। महासमाधि दिवस के उपलक्ष्य में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। आश्रम प्रबंधन की ओर से बताया गया कि यह 50वां वर्ष स्वामी जी के संकल्पों को जन-जन तक पहुँचाने के संकल्प का वर्ष । पूज्य स्वामी जी की सुरक्षा में गौरेला पेंड्रा थाना के पुलिस बल का सराहनीय योगदान रहा। सोनकुंड में कार्यक्रम सम्पन्न होने के पश्चात पूज्य स्वामी जी हनुमानगढ़ी आश्रम कुरुवार गये जहाँ पर पूज्य स्वामी जी के करकमलों द्वारा पुरानी रामकुटी के स्थान पर नई रामकुटी बनाने हेतु भूमि पुजन किया गया