*मेरी शिक्षिका भगिनी (अत्रि की कलम से)*🇮🇳
*महिलाओं की पाती मातृशक्ति के नाम महासमुंद की ओर*
*प्रांत स्तरीय महिला शिक्षक सम्मेलन एवं सम्मान समारोह (19-20 सितंबर 2026) पर विशेष लेख*
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नमस्ते साथी!
हम वो हैं, जो सुबह सबसे पहले उठती हैं। चूल्हा भी संभालती हैं, और चॉक भी। रसोई की जिम्मेदारी भी हमारी, और राष्ट्र के भविष्य की भी। ब्लैकबोर्ड पर अक्षर लिखते-लिखते हम जाने कितनी पीढ़ियों का भविष्य गढ़ देती हैं।
और आज, पहली बार... सिर्फ हमारे लिए, हमारे नाम एक पूरा सम्मेलन।
*छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने जो सोचा है, वो सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, इतिहास है।*
19-20 सितंबर को जब हम महासमुंद के आई.आर. रिसॉर्ट में मिलेंगी, तो वह केवल 33 जिलों की 660 महिला शिक्षकों का मिलना नहीं होगा। वह छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति का महाकुंभ होगा।
*क्यों जरूरी है यह सम्मेलन?*
क्योंकि अक्सर मंचों पर हमारी संख्या कम होती है। फैसले कहीं और होते हैं, और हम सिर्फ पालन करती हैं। लेकिन इस बार मंच भी हमारा है, माइक भी हमारा है, और सत्र प्रभारी भी हम ही हैं।
*खुला सत्र (10.45 बजे)* में जब हम कहेंगी - "महिला शिक्षकों की आवाज", तो वह आवाज सिर्फ शिकायत नहीं होगी। वह समाधान होगी। हम बताएंगी कि कैसे हम दूरस्थ स्कूलों में अकेले संघर्ष करती हैं, कैसे हम बच्चियों को स्कूल तक लाती हैं, कैसे हम समाज की कुरीतियों से लड़ती हैं।
*बौद्धिक सत्र का विषय - "मातृशक्ति राष्ट्र निर्माण की आधार शिला"* - यह केवल एक वाक्य नहीं। यही सत्य है। डॉक्टर, इंजीनियर, कलेक्टर, मंत्री - सबकी पहली गुरु एक महिला ही तो होती है। माँ के रूप में, और फिर शिक्षिका के रूप में।
*सम्मान सत्र का अर्थ:*
यह सम्मान सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं है। जब एक महिला शिक्षिका का सम्मान होता है, तो हजारों बच्चियों को एक सपना मिलता है कि "मैं भी बन सकती हूँ।" गाँव की वह बच्ची जो स्कूल नहीं जाना चाहती, वह जब अपनी दीदी को सम्मानित होते देखेगी, तो वह भी किताब उठा लेगी। यही तो है - *शिक्षित नारी, सशक्त भारत।*
*महासमुंद से क्या लेकर जाएंगे?*
हम यहाँ से केवल फोटो और प्रमाण-पत्र लेकर नहीं जाएंगे। हम लेकर जाएंगे -
1. एक दूसरे का साथ
2. एक नई ऊर्जा कि हम अकेली नहीं हैं
3. समाज परिवर्तन के लिए पंच परिवर्तन का संकल्प
प्रांतीय मीडिया शाखा ने सही लिखा है - *"सशक्त महिला, सशक्त समाज, सशक्त राष्ट्र"*
तो आओ बहनों, इस कालजई और गौरवपूर्ण आयोजन में शामिल होकर इतिहास रचें। यह निमंत्रण नहीं, यह हमारी अपनी पाती है, अपने आप के नाम।
क्योंकि जब एक महिला शिक्षिका जागती है, तो पूरा समाज जागता है।
*चलो महासमुंद!*
*- अत्रि प्रताप सिंह की कलम से*:
*प्रांत स्तरीय महिला शिक्षक सम्मेलन, महासमुंद के लिए*
विनीत:
ओंकार सिंह प्रांतीय संगठन मंत्री
संजय सिंह प्रांताध्यक्ष
उमेश भारतीय गोस्वामी कार्यकारी अध्यक्ष
मनोज राय महामंत्री
टिकेश सिंह मीडिया प्रभारी
अत्रि प्रताप सिंह प्रांतीय प्रवक्ता
छग शिक्षक संघ
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