*बिलासपुर में मनाया गया तर्कवादी पत्रकार गौरी लंकेश का स्मृति शहादत दिवस; अंबेडकर और गुरुघासीदास के विचारों के साथ जाति उन्मूलन का संकल्प*
*बिलासपुर।* छत्तीसगढ़ जाति उन्मूलन आंदोलन (CAM) की छत्तीसगढ़ इकाई एवं गुरुघासीदास सेवादार संघ (GSS) के संयुक्त तत्वाधान में आज दिनांक 05 सितंबर 2026 को बिलासपुर में तर्कवादी पत्रकार गौरी लंकेश का स्मृति शहादत दिवस बड़े ही शोक, आक्रोश और संकल्प के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य 5 सितंबर 2017 को बेंगलुरु में उनकी हत्या के खिलाफ आवाज उठाना, सांप्रदायिक व फासीवादी ताकतों के खिलाफ एकजुटता प्रकट करना और डॉ. भीमराव अंबेडकर व गुरुघासीदास के जाति उन्मूलन के विचारों को आगे बढ़ाना था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने याद दिलाया कि, जब गौरी लंकेश काम से लौटकर अपने घर आ रही थीं, तब ब्राह्मणवादी/ हिंदुत्ववादी संगठनों से जुड़े लोगों ने उनकी निर्मम हत्या कर दी थी। आगे कहा कि गौरी लंकेश एक ऐसी आवाज थीं जो हमेशा दलितों, आदिवासियों, ओबीसी और अन्य उत्पीड़ित वर्गों के अधिकारों के लिए लड़ती रहीं। उनकी हत्या केवल एक पत्रकार की नहीं, बल्कि तर्क, विवेक और सामाजिक न्याय की आवाज को दबाने की एक साजिश थी।
इस अवसर पर वक्ताओं ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के 'जातियों का विनाश' (Annihilation of Caste) के विचारों को याद किया। उन्होंने कहा कि अंबेडकर साहब ने स्पष्ट किया था कि ,जाति व्यवस्था ने हिंदू समाज को बर्बाद कर दिया है और इसका विनाश केवल तभी संभव है ; जब शास्त्रों की दैवीय सत्ता को नकारा जाए। वक्ताओं ने कहा कि गौरी लंकेश का संघर्ष अंबेडकर के इसी विचार से प्रेरित था, जाति व्यवस्था और ब्राह्मणी विचारधारा का विनाश।
अंबेडकर साहब ने कहा था, "जाति ने सार्वजनिक भावना को मार दिया है, सार्वजनिक दान की भावना को नष्ट कर दिया है।" वक्ताओं ने कहा कि,गौरी लंकेश की हत्या इसी व्यवस्था का परिणाम है, जो तर्क और सवाल उठाने वालों को बर्दाश्त नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि जब तक जाति व्यवस्था का अंत नहीं होगा, तब तक गौरी लंकेश जैसे लोगों की शहादत व्यर्थ जाएगी।
गुरुघासीदास के सतनाम आंदोलन के विचारों को भी प्रमुखता से रखा गया। और कहा कि गुरुघासीदास ने 200 वर्ष पूर्व छत्तीसगढ़ में सतनाम धर्म की स्थापना कर जाति व्यवस्था, छुआछूत और वर्ण व्यवस्था का डटकर विरोध किया था। उन्होंने अपने अनुयायियों को जातिगत नाम छोड़कर 'सतनामी नाम' अपनाने का आह्वान किया था, जिससे सभी जातियों का विनाश हो और एक समान पहचान बने।
वक्ताओं ने कहा कि गुरुघासीदास का सात-सूत्रीय मार्ग सतनाम (ततनाम) , मनुजनाम, बानानाम, स्वाभिमाननाम, बलिदाननाम,राजनाम, प्रकाशनाम आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि सतनाम आंदोलन का मूल उद्देश्य विभिन्न जातियों का विनाश कर उनका उन्मूलन करना था, ताकि एक समान समाज की स्थापना हो सके।
आगे वक्ताओं ने मनुस्मृति तथा ब्राह्मणवादी विचारधारा पर आधारित अमानवीय जाति व्यवस्था पर कड़ा प्रहार किया और कहा कि आज भी यह व्यवस्था दलितों, आदिवासियों, ओबीसी तथा अन्य उत्पीड़ित वर्गों के खिलाफ भेदभाव और अपमान का कारण बनी हुई है। यह भी कहा कि गौरी लंकेश की हत्या इसी विचारधारा का परिणाम है, जो तर्क और सवाल उठाने वालों को बर्दाश्त नहीं कर सकती। आगे कहा गया कि,जब तक जाति व्यवस्था और ब्राह्मणी विचारधारा का अंत नहीं होगा, तब तक गौरी लंकेश जैसे लोगों की शहादत व्यर्थ जाएगी।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ जाति उन्मूलन आंदोलन (CAM) के अध्यक्ष श्री लखन सुबोध और राज्य संयोजक वीरेंद्र भारद्वाज ने मुख्य रूप से भाग लिया। श्री सुबोध ने कहा, "गौरी लंकेश की हत्या एक संकेत है कि फासीवादी ताकतें कैसे तर्क और विवेक की आवाज को दबाना चाहती हैं। लेकिन हम उनकी आवाज को कभी दबने नहीं देंगे। हम अंबेडकर और गुरुघासीदास के विचारों पर चलते हुए जाति उन्मूलन के संघर्ष को और तेज करेंगे।"
वीरेंद्र भारद्वाज ने कहा, "गौरी लंकेश का संघर्ष हमारे लिए प्रेरणा है। हम उनकी राह पर चलते हुए जाति व्यवस्था और फासीवादी ताकतों के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे। गुरुघासीदास ने सतनाम आंदोलन के माध्यम से दिखाया था कि, कैसे विभिन्न जातियों का विनाश कर एक समान समाज बनाया जा सकता है। हमारा संकल्प है कि हम छत्तीसगढ़ एवं भारत भर में जाति उन्मूलन का आंदोलन और मजबूत करेंगे।"
इस कार्यक्रम में रूपदास टंडन (जिला संयोजक मुंगेली CAM) , दिनेश सतनाम (जिला संयोजक रायपुर CAM), एवं GSS से एड.महेश आर्य,राजेश जांगड़े, शुकालु कोठारी, अजय अनंत, गुलाब आर्य, मनमोहन बांधे, नैनदास आर्य, नेतराम खांडे, गुलाबचंद कुर्रे सहित कई दर्जन लोग शामिल हुए। CAM/GSS के सदस्यों ने गौरी लंकेश को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि गुरुघासीदास के
विचार, अंबेडकर का 'जातियों का विनाश' और गौरी लंकेश का संघर्ष एक ही दिशा में हैं—जाति व्यवस्था का अंत और सामाजिक न्याय की स्थापना।
अंत में समापन के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने संकल्प लिया कि वे गौरी लंकेश के सपनों, अंबेडकर के 'जातियों का विनाश' और गुरुघासीदास के सतनाम आंदोलन के विचारों को साकार करने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे और जाति व्यवस्था व फासीवादी ताकतों के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे।
*दिनाँक –* 05.09.2026
*संलग्न –* कार्यक्रम का विडियो –फोटो
जारीकर्ता
*निर्मल मरकाम*
जिला संयोजक बिलासपुर–CAM
मो.–8717834059