शिक्षक महिला सम्मेलन की आवश्यकता क्यों? - प्रदेश भर की महिला शिक्षिकाओं की सहभागिता क्यों अनिवार्य है
- अत्रि प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष मुंगेली
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ द्वारा 19-20 सितंबर को महासमुंद में आयोजित हो रहा प्रांत स्तरीय महिला शिक्षक सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा जगत में नारी शक्ति की भूमिका को पुनर्परिभाषित करने का ऐतिहासिक प्रयास है।
1. आवश्यकता क्यों?
क) परिवार से राष्ट्र निर्माण तक का सेतु हैं महिला शिक्षिका
आज प्रदेश में 60% से अधिक प्राथमिक शिक्षा की नींव महिला शिक्षिकाओं के हाथों में है। बच्चा पहला अक्षर आंगनवाड़ी से लेकर पहला संस्कार तक महिला शिक्षिका से ही सीखता है। यदि परिवार निर्माण से राष्ट्र निर्माण करना है, तो महिला शिक्षिका को वैचारिक रूप से सशक्त करना होगा। यही इस सम्मेलन का मुख्य विषय भी है।
ख) चुनौतियां अलग हैं, समाधान भी अलग चाहिए
पुरुष शिक्षकों और महिला शिक्षिकाओं की चुनौतियां एक समान नहीं हैं। ग्रामीण अंचल में पदस्थापना, मातृत्व अवकाश, बच्चों की परवरिश के साथ शिक्षकीय दायित्व, कार्यस्थल पर सुरक्षा और सम्मान, स्थानांतरण नीति में महिला हितों की अनदेखी - इन सब पर खुलकर चर्चा केवल महिला मंच पर ही संभव है। इसलिए अलग सत्र - "महिला शिक्षक: चुनौतियां और समाधान" रखा गया है।
ग) पंच परिवर्तन में महिला की निर्णायक भूमिका
शिक्षा के साथ-साथ समाज में समरसता, पर्यावरण, कुटुंब प्रबोधन, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्य - ये पंच परिवर्तन बिना महिला शिक्षिका के संभव नहीं। क्योंकि एक महिला शिक्षिका एक साथ 40 बच्चों के साथ 40 परिवारों को भी प्रभावित करती है।
2. प्रदेश भर की सहभागिता क्यों जरूरी है?
क) नीति निर्माण में भागीदारी: जब तक बस्तर से सरगुजा तक की महिला शिक्षिका अपनी बात प्रदेश मंच पर नहीं रखेगी, तब तक शासन तक हमारी सही मांग नहीं पहुंचेगी। यह सम्मेलन सीधे शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव जी और महिला बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े जी की उपस्थिति में हो रहा है - यह अपनी बात रखने का सबसे बड़ा अवसर है।
ख) संगठन में 50% भागीदारी: राष्ट्र हित, शिक्षा हित और शिक्षक हित के नारे को तब तक पूरा नहीं किया जा सकता जब तक संगठन में महिला शक्ति की 50% सक्रिय भागीदारी न हो। आज भी प्रांतीय से लेकर जिला कार्यकारिणी में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की आवश्यकता है।
ग) सम्मान और प्रेरणा: 20 सितंबर को आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में उन महिला शिक्षिकाओं का सम्मान होगा जिन्होंने विषम परिस्थितियों में उत्कृष्ट कार्य किया है। यह सम्मान हजारों अन्य बहनों के लिए प्रेरणा बनेगा।
घ) एकजुटता ही शक्ति है: महासमुंद में जब 33 जिलों की महिला शिक्षिकाएं एक साथ बैठेंगी, तो एक नया नेटवर्क बनेगा। सुख-दुख, कानूनी जानकारी, नवाचारों का आदान-प्रदान - यह नेटवर्क आगे चलकर पूरे प्रदेश की महिला शिक्षिकाओं की ताकत बनेगा।
अंत में -
यह सम्मेलन किसी एक जिले का नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ की शिक्षा संस्कृति का सम्मेलन है।
समस्त महिला शिक्षकों से आह्वान है कि इस ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनें। आपकी उपस्थिति ही इस सम्मेलन की सफलता है और आपकी सहभागिता ही आने वाली शिक्षा नीति की दिशा तय करेगी।
आइए, हम सब मिलकर नारा बुलंद करें -
"सशक्त महिला शिक्षिका - सशक्त छत्तीसगढ़ - सशक्त भारत"
स्थान: I.R. Resort, महासमुंद
दिनांक: 19-20 सितंबर 2026
विनीत :
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ