छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं तकनीकी परिषद रायपुर तथा कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र कोरबा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण ग्राम भाड़ा पचपेड़ी विकासखंड मस्तूरी जिला रायपुर में बिलासपुर में संपन्न हुआ


भड़हा दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण संपन्न 
छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं तकनीकी परिषद रायपुर तथा कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र कोरबा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण ग्राम भाड़ा पचपेड़ी विकासखंड मस्तूरी जिला रायपुर में बिलासपुर में संपन्न हुआ कार्यक्रम में ग्राम पंचायत पर पचपेड़ी के सरपंच श्री टंडन जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे साथ ही युवा नेता अरविंद डहरिया जी की उपस्थिति रही कार्यक्रम में मुख्य प्रशिक्षण प्रदान करता के रूप में डॉ चेतना जांगड़े पादप रोग विज्ञान कृषि महाविद्यालय कोरबा रही जिन्होंने कृषकों को बीज एवं मृदा से उत्पन्न होने वाले रोगों के विषय में संक्षिप्त जानकारी दी तथा बीज परीक्षण करने के तकनीकी उपाय भी बताए गए जिसमें मुख्य रूप से 17% नामक गोल में बीज उपचार करके धान से पोछी एवं बदरा हटाना तथा जैव उर्वरक जैसे कि पी एस बी एजोटोबैक्टर राइजोबियम एवं अन्य जैव उर्वरकों का उपयोग कर बीज उपचार का विधिवत प्रशिक्षण प्रदर्शन के माध्यम से प्रदान किया गया, जिसे कृषकों ने पहली बार देखा तत्पश्चात डॉ आशीष केरकेट्टा के द्वारा वर्तमान कृषि में नवाचार के संबंध में संक्षिप्त जानकारी दी गई। श्री ए के अहीर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी मस्तूरी जिला बिलासपुर के द्वारा विभाग में संचालित विभिन्न योजनाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई तथा मिट्टी परीक्षण किए हुए किसानों की सूची भी अवलोकन करवाया गया। अंत में कार्यक्रम के आयोजन करता एवं परियोजना प्रभारी डॉ रोशन भारद्वाज के द्वारा धान के फसल एवं लघु धन्य के विपणन संबंधी जानकारी प्रदान की गई है कार्यक्रम में ग्राम भाड़हा रेल्हा, पटौदी रेल्हा धूर्वकारी पचपेड़ी एवं अन्य गांव से लगभग 100 से ऊपर संख्या में कृषक एवं दीदी उपस्थित रहे।
 इस प्रशिक्षण मे लगभग 110 किसानों की सहभागिता रहा ग्राम रैल्हा भड़हा मानिकचौरी कोकड़ी भटचौरा केवतरा पचपेड़ी जैतपुरी अमगांव के किसान शामिल हुवे फसल प्रबंधन तकनीक एवम आगामी रबी फसलों के बोनी हेतू कार्योंजना के साथ साथ दल्हन तिलहन फसल विस्तार हेतू आवश्यक तकनिकी सालाहो से अवगत कराया गया किसानों द्वारा अधिक से अधिक रकबा मे खेती करने हेतू अपना विचार रखे एवम आर्थिक स्तिथि मे परिवर्तन कर उन्नति की ऒर अग्रसर होने हेतू संकल्प लिया गया इसमें क़ृषि विभाग की अहम् भूमिका रहा

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