विश्व स्ट्रोक दिवस पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पदमपुर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

समय पर बीपी की जांच, नियमित दवा और स्वस्थ जीवनशैली से कम होगा स्ट्रोक का खतरा, अब युवाओं को भी सतर्क रहने की जरूरत—स्ट्रोक उम्र देखकर नहीं आता — डॉ. मनीष बंजारा


मुंगेली। विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पदमपुर में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान 30 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों का रक्तचाप (बीपी) परीक्षण कर उन्हें उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक के लक्षणों, बचाव और समय पर उपचार के महत्व की जानकारी दी गई।

डॉ. मनीष बंजारा ने बताया कि स्ट्रोक तब होता है, जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति रुक जाती है या रक्तवाहिका फट जाती है। चेहरे का एक तरफ झुकना, हाथ-पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन, बोलने में कठिनाई, दृष्टि प्रभावित होना और संतुलन बिगड़ना इसके प्रमुख लक्षण हैं। समय पर पहचान और तत्काल उपचार से जीवन बचाया जा सकता है तथा स्थायी दिव्यांगता का खतरा कम किया जा सकता है।

उन्होंने उच्च रक्तचाप के मरीजों को आगाह करते हुए कहा कि बीपी सामान्य होने पर अपनी मर्जी से दवा बंद करना, दवा नियमित नहीं लेना, जांच से बचना, अधिक नमक खाना और बिना चिकित्सकीय सलाह खुराक बदलना गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा, “बीपी की दवा लेना कमजोरी नहीं, बल्कि अपने जीवन और परिवार की खुशियों की सुरक्षा करना है।” मरीज नियमित जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह के बिना उपचार बंद न करें।

 उच्च रक्तचाप कई बार बिना स्पष्ट लक्षणों के भी बना रहता है। इसलिए अच्छा महसूस करना सामान्य बीपी की गारंटी नहीं है। युवाओं को भी नियमित रक्तचाप जांच, संतुलित आहार, शारीरिक गतिविधि, वजन नियंत्रण तथा तंबाकू और धूम्रपान से दूरी को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।

उन्होंने जोर दिया कि स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही घरेलू उपचार या झाड़-फूंक में समय गंवाने के बजाय मरीज को तत्काल एम्बुलेंस से स्ट्रोक उपचार की सुविधा वाले अस्पताल पहुंचाएं। लक्षण शुरू होने का समय नोट करें और लक्षण कुछ देर में ठीक हो जाने पर भी अनदेखी न करें।
युवाओं से अपील की कि व्यस्त दिनचर्या के बीच अपने स्वास्थ्य की अनदेखी न करें। नियमित रक्तचाप जांच कराएं, प्रतिदिन शारीरिक गतिविधि को अपनाएं, संतुलित भोजन करें और तंबाकू तथा धूम्रपान से दूर रहें

इस अवसर पर जगदीश टंडन, किशोर उइके, अंकिता, सुनीता, मोनिका, संतोष त्रिवेणी एवं सुधा उपस्थित रहे।

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