मुंगेली के सर्व समाज प्रमुखों का महासंगम: "अपनी जाति से ऊपर उठकर 'हिंदू भाव' को जगाना ही विश्व शांति का मार्ग"



मुंगेली के सर्व समाज प्रमुखों का महासंगम: 

"अपनी जाति से ऊपर उठकर 'हिंदू भाव' को जगाना ही विश्व शांति का मार्ग"

मुंगेली। सरस्वती शिशु मंदिर, पेंडराकापा में रविवार को मुंगेली विकासखंड के सर्व समाज प्रमुखों की एक महत्वपूर्ण 'आपसी संवाद एवं सामाजिक सद्भाव बैठक' संपन्न हुई। बैठक में 45 से अधिक समाजों के 70 प्रतिनिधियों ने शिरकत की, जहाँ सामाजिक एकता, सांस्कृतिक गौरव और आपसी भाईचारे को मजबूत करने पर गहन मंथन हुआ।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और तत्व ज्ञान पर जोर
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए आकाश परिहार ने स्वागत भाषण में कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति विविधता को स्वीकार करने वाली संस्कृति है। उन्होंने "एकम सत विप्र बहुधा वदन्ति" का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि भारतीय संस्कृति की जय होगी, तभी विश्व से युद्ध का खतरा टलेगा और सभ्य समाज की स्थापना होगी।
मुख्य वक्ता पूर्णेन्दु भट्ट ने आत्मचिंतन पर जोर देते हुए कहा, "हमारा तत्व ज्ञान उत्कृष्ट है, पर हम उस पर चलते नहीं हैं। हमें 'ईशा वास्यमिदं सर्वम्' के भाव को जीवन में उतारना होगा।" इसी कड़ी में माणिक सोनवानी ने 'वसुधैव कुटुंबकम' और दिनेश सोनी ने भारतीय तत्वज्ञान को मानवता की विजय का आधार बताया।
संगठन और सामाजिक समरसता की आवश्यकता
बैठक में रामशरण यादव ने स्पष्ट किया कि भारत की विजय तभी संभव है जब इस तत्व ज्ञान को मानने वाले संगठित होंगे और अपने 'स्व' (आत्मबोध) पर गर्व करेंगे। दिलीप बंजारा और विकास खांडेकर शिवकुमार बंजारा,ब्रह्मदत्त त्रिपाठी ने जातिगत भेदभाव से ऊपर उठने का आह्वान किया। त्रिपाठी जी ने कहा, "हमें अपनी जाति की लकीर छोटी किए बिना हिंदू भाव की लकीर बड़ी करनी होगी।"
विविधता में एकता का संदेश
• संदीप ताम्रकार ने रेखांकित किया कि हमारे नाम, तीर्थ, ग्रंथ और त्योहार एक हैं। सभी भाषाओं की जननी संस्कृत है, जो हमें जोड़ती है।
• पुहुप साहू ने सामाजिक न्याय की बात करते हुए कहा कि हमें उन चीजों के बजाय कर्म पर ध्यान देना चाहिए जो हमारे हाथ में नहीं हैं।
• बंटी मक्कड़ ने गुरु नानक देव जी के संदेशों को हिंदू समाज की एकता का सूत्र बताया।
• शरद ताम्रकार और रमेश कुलमित्र ने वर्तमान समय में भाईचारे को समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
• दिनेश निर्मलकर ने व्यावहारिक सुझाव देते हुए गांवों में एकता के प्रतीक स्वरूप 'एक घाट' की अवधारणा रखी।
• अशोक सोनी ने पूरे समाज के बीच अटूट सद्भाव बनाने की अपील की।
अनुकरणीय व्यवस्था और उपस्थिति
कार्यक्रम का कुशल संचालन मनोहर यादव ने किया, जिन्होंने यादव समाज द्वारा किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों का विवरण भी साझा किया। बैठक में मुख्य रूप से हजारी साहू, ताकेश्वर साहू, सुरेश केसरवानी किरण गुप्ता, दीपक सोनकर, कौशल साहू, रोहित सागर,अनीश सोनी, निलेश भारद्वाज, कमल सोनी,राजेश रजक, रामकुमार जयसवाल सहित विभिन्न समाजों के प्रमुख जन उपस्थित रहे।
संवाद के पश्चात सभी समाज प्रमुखों ने 'संगत के बाद पंगत' की परंपरा का निर्वाह करते हुए एक साथ भोजन ग्रहण किया, जो सामाजिक समरसता की एक जीवंत तस्वीर पेश कर गया।
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