गौवंशों के पैरों में लकड़ी बांधने की स्थिति खत्म करने और गौचर भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग
मुंगेली। ग्राम पंचायत प्रतापपुर, थाना लोरमी, जिला मुंगेली में गौवंशों के पैरों में लकड़ी बांधकर रखने की स्थिति को समाप्त करने तथा गौचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर गौवंशों के लिए सुरक्षित करने की मांग को लेकर गौ सेवा कल्याण समिति, मुंगेली द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, मुंगेली को ज्ञापन सौंपा गया।
समिति ने ज्ञापन में बताया कि ग्राम प्रतापपुर में वर्तमान में कई गौवंशों के पैरों में लकड़ी बांधकर रखी जा रही है। ग्रामीणों द्वारा ऐसा मुख्य रूप से इस कारण किया जा रहा है कि गौवंश खेतों में जाकर फसलों को नुकसान न पहुंचाएं। गौ सेवकों द्वारा जब ऐसे गौवंशों के पैरों से लकड़ी खोलकर उन्हें स्वतंत्र करने का प्रयास किया जाता है, तो कुछ ग्रामीणों के साथ गाली-गलौज एवं विवाद की स्थिति भी उत्पन्न होती है।
ज्ञापन के अनुसार ग्राम प्रतापपुर में गौवंशों के चरने के लिए 25 एकड़ से अधिक गौचर भूमि उपलब्ध है तथा ग्राम में गौठान भी स्थित है। लेकिन गौचर भूमि पर स्थानीय लोगों द्वारा किए गए कब्जे-अतिक्रमण के कारण गौवंशों को पर्याप्त चराई क्षेत्र उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। समिति का कहना है कि इसके परिणामस्वरूप गौवंशों को नियंत्रित रखने के लिए उनके पैरों में लकड़ी बांधने जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है।
समिति ने प्रशासन से गौचर भूमि का राजस्व अभिलेख के आधार पर सीमांकन एवं स्थल निरीक्षण, अवैध कब्जे-अतिक्रमण की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई तथा गौचर भूमि को गौवंशों की चराई एवं संरक्षण के लिए सुरक्षित करने की मांग की है।
इसके साथ ही ग्राम में गौवंशों के पैरों में लकड़ी बांधने की स्थिति समाप्त करने, गौ सेवकों के साथ गाली-गलौज अथवा विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो इसके लिए संबंधित अधिकारियों एवं पुलिस प्रशासन को आवश्यक निर्देश देने तथा ग्राम के गौठान एवं गौचर भूमि का वास्तविक उपयोग गौवंशों के हित में सुनिश्चित कराने की मांग की गई है।
ज्ञापन में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विभिन्न मामलों में सार्वजनिक एवं सामुदायिक उपयोग की भूमि को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप उपयोग किए जाने को लेकर दिए गए निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है। समिति ने प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्राम प्रतापपुर की गौचर भूमि का तत्काल स्थल निरीक्षण एवं सीमांकन कराकर, यदि अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार उसे हटाने की कार्रवाई करने तथा गौवंशों के लिए पर्याप्त एवं सुरक्षित चराई क्षेत्र उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।