निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान, बकाया मजदूरी, महिला मजदूर के साथ जानबूझकर शोषण एवं प्रताड़ना तथा श्रम कानूनों के गंभीर उल्लंघन की शिकायत पर लोक सिरजनहार यूनियन (LSU) द्वारा श्रम विभाग से त्वरित जाँच एवं न्याय की माँग

*निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान, बकाया मजदूरी, महिला मजदूर के साथ जानबूझकर शोषण एवं प्रताड़ना तथा श्रम कानूनों के गंभीर उल्लंघन की शिकायत पर लोक सिरजनहार यूनियन (LSU) द्वारा श्रम विभाग से त्वरित जाँच एवं न्याय की माँग* 

                *प्रेस विज्ञप्ति*

लोक सिरजनहार यूनियन (LSU) के अध्यक्ष श्री *लखन सुबोध* को एक आवेदन मिला । जिसमें *दिल्ली पब्लिक स्कूल,* बिलासपुर में ठेकेदार *शशि कुमार कौशिक* के माध्यम से सफाई एवं अन्य कार्यों में संलग्न श्रीमती *राजेश्वरी मिरी* पति फिरतराम मिरी, निवासी वार्ड क्रमांक 8, नया मन्नाडोल, तिफरा, बिलासपुर को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम, अर्थात् केवल ₹183 प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया गया, जबकि उन्हें समय से अधिक कार्य करना पड़ता था।
                       यह अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है कि, पीड़िता एक महिला मजदूर हैं और भारत में महिला श्रमिकों के साथ होने वाले शोषण की यह एक और दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण है।  महिला मजदूरों को अक्सर उनकी कमजोर सामाजिक-आर्थिक स्थिति, शिक्षा की कमी और पारिवारिक दबावों का फायदा उठाते हुए शोषित किया जाता है।  इस मामले में भी पीड़िता के साथ महिला होने के कारण जानबूझकर  प्रताड़ना और शोषण किया गया।
                        पीड़िता महिला मजदूर को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी दर (जो सफाई कर्मियों के लिए ₹300-350 प्रतिदिन के आसपास है) से काफी कम, केवल ₹183 प्रतिदिन का भुगतान किया गया।  महिला मजदूरों को अक्सर यह मानकर कम मजदूरी दी जाती है कि वे विरोध नहीं करेंगीं या उन्हें विकल्प नहीं है।
                    दिन सोमवार से शनिवार तक 8.5 घंटे और रविवार को भी 6 घंटे का कार्य, बिना किसी अतिरिक्त भत्ते या ओवरटाइम भुगतान के मजदूरी कराता रहा ।  
                    श्रम कानूनों के अंतर्गत नियमित साप्ताहिक अवकाश, त्योहारी अवकाश तथा न्यूनतम मजदूरी का पूर्ण भुगतान सुनिश्चित करना नियोक्ता एवं ठेकेदार की वैधानिक जिम्मेदारी है।  किंतु पीड़िता को न तो नियमित अवकाश मिला और न ही लागू न्यूनतम मजदूरी दर के अनुरूप पूरा भुगतान हुआ। 
                     जब पीड़िता मजदूरी की उचित माँग करतीं, तो उन्हें अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया जाता, धमकियाँ दी जातीं, और कार्य के दौरान बार-बार टोका-टाकी की जाती।  
                      मजदूरी की उचित माँग करने पर पीड़िता को कार्य से हटा दिया गया, जो कि श्रम अधिकारों का खुला उल्लंघन है और महिला मजदूर के विरुद्ध प्रतिशोध की कार्रवाई है।  
                        ठेकेदार द्वारा महिला मजदूर की कमजोर स्थिति का फायदा उठाते हुए उन्हें कानूनी अधिकारों से वंचित रखा गया।
                    पीड़िता द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक गणना के अनुसार, उनकी बकाया मजदूरी की अनुमानित राशि लगभग ₹1,13,000 (एक लाख तेरह हजार रुपये) बनती है, जो केवल प्रारंभिक अनुमान है और अंतिम जाँच एवं अभिलेखों के आधार पर वास्तविक राशि का निर्धारण होना आवश्यक है।
                 लोक सिरजनहार यूनियन छत्तीसगढ़ के श्रमिकों, विशेषकर प्रवासी श्रमिकों, सफाईकर्मियों, महिला मजदूरों एवं ठेकेदारी प्रणाली में कार्यरत मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहा है। 
                   यूनियन ने पूर्व में भी बंधुआ मजदूरी, न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान, महिला श्रमिकों के शोषण तथा श्रमिक शोषण के विरुद्ध प्रभावी हस्तक्षेप किए हैं।
                        LSU का मानना है कि श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वाले नियोक्ताओं एवं ठेकेदारों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए तथा पीड़ित श्रमिकों, विशेषकर महिला मजदूरों को न्याय दिलाने में श्रम विभाग को त्वरित एवं निष्पक्ष भूमिका निभानी चाहिए। 
                        भारत में महिला मजदूरों के साथ होने वाला शोषण एक गंभीर सामाजिक समस्या है, और ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई न केवल पीड़िता को न्याय दिलाएगी, बल्कि अन्य महिला मजदूरों को भी आवाज उठाने का साहस देगी।

*विशेष टिप–* श्रम विभाग द्वारा इस पर तत्काल कार्यवाही नहीं करने पर लोक सिरजनहर यूनियन (LSU) जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। जिसकी जवाबदेही प्रशासन एवं सरकार की होगी।
     
*दिनाँक –* 08.10.26
*संलग्न –* पोस्टर को पढ़ें।
 
                             जारीकर्ता 
                        *सत्यवती भारती*
                     LSU –  संगठन सचिव
                 (जिला कमेटी बिलासपुर)
               मो.–+91 70241 53928

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